Follow Me on Pinterest

कैसे कहू के तू अब

कैसे कहू के तू अब या तब याद नहीं आता
याद तो आती है मगर, याद आने का सबब याद नहीं आता
किस हुनर से लूट लिया तनहा दिल को तुमने मेरे
वो चोरी तो याद है मगर, वो वक़्त याद नहीं आता
क्यों कर है इतनी मोहब्बत मुझको तुमसे
कोई राज कोई फ़साना याद नहीं आता
जब से आये हो जिंदगी में मेरे
कोई चारागर, कोई नासेह नज़र नहीं आता
क्यों कर पूछे है जमाना ‘शादाब’ तुझसे
जब वो जाने है के, तुझे कोई बहाना याद नहीं आता !!!


Get Free Email Updates Daily

Thanks for visiting Shayari Unplugged. Kindly Bookmark and Share

Technorati Digg This Stumble Stumble Facebook Delicious blinklist google myspace googleplus sharethis

Leave a comment