Follow Me on Pinterest

कौन जीता है अब यहाँ

कौन जीता है अब यहाँ कलंदर की तरह,
फूल भी देते हैं लोग पत्थर की तरह,
दोस्तों से अब कैसी वफ़ा की उमीदें,
इनकी बातें भी चुभती हैं खंजर की तरह,
अपने-अपने नसीब के कुछ किस्से हैं यारो,
कतरा भी इतराता है अब समंदर की तरह.
दुनिया पर अपनी हुकूमत चलने वाले सुन लो,
खाली हाथ जाओगे तुम भी एक दिन सिकंदर की तरह,
संसार की इस भेद-भाव में कुछ हासिल नहीं,
दिल साफ़ हो सबका गुरु के किसी लंगर की तरह,
ख्वाइश अफसोस ना कर अपनों को बदलता देखकर,
यहाँ लोग बदलते हैं बदलते हुए मुक़द्दर की तरह !!!

Get Free Email Updates Daily

Thanks for visiting Shayari Unplugged. Kindly Bookmark and Share

Technorati Digg This Stumble Stumble Facebook Delicious blinklist google myspace googleplus sharethis

Leave a comment