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तेरी आँखों से जो ये अश्क गिरते है

तेरी आँखों से जो ये अश्क गिरते है
मेरे सीने में वो, गहरे से उतरते हैं
एक मदहोशी है, उनके प्यार में ऐ-दिल
मेरी बगिया में आके, वो यूँ महकते है
हम तो इश्क में डूबे है, मजनू की तरह
ये नादान लोग, हमें पागल समझते है
मैं कही उनको भूल ना जाऊ कभी
इसलिए वो, मेरे दिल में धड़कते है
ना जाने कौनसा रिश्ता है, तुझसे मेरा
यूँ ही नहीं, तेरे दर्द, मेरे सीने में पिगलते है !!!


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