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ढूंढता हूँ हर चेहरे में, चेहरा उसका

ढूंढता हूँ हर चेहरे में, चेहरा उसका
वो ख्वाबो में भी लगे है, ख्यालो जैसी
मेरे हर लफ्ज़ समझे है, लब पे आने से पहले
फिर क्यों है उसकी आँखें सवालो जैसी
लबों ने ऐसा जादू किया काफिर तेरे
जगे में भी रहे मेरी सूरत, सोनेवालो जैसी
भूल गया ये जहां, उलझ कर जुल्फों में तेरी
खुदा न बना पाया, कडिया तेरे बालो जैसी
कितनी तारीफ तेरे हुस्न की करे ‘शादाब’
वो दैर में बैठा , हालत पीनेवालो जैसी !!!


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